राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (National Education Policy-2020)

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020” (National Education Policy-2020) को हाल ही में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है. 34 साल पुरानी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986’ को नई शिक्षा नीति प्रतिस्थापित करेगी.
मुख्य बिंदु
जून 2017 में पूर्व इसरो (ISRO) प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था.
साल 1968 और 1986 के बाद यह भारत की तीसरी शिक्षा नीति होगी.
National Education Policy-2020 में शिक्षा क्षेत्र पर देश भर की जीडीपी के 6% हिस्से के निवेश का लक्ष्य निर्धारित है.
नई शिक्षा नीति में 10+2 मॉडल के स्थान पर पाठ्यक्रम को 5+3+3+4 प्रणाली के आधार पर विभाजित किया जायगा.
दिव्यांग छात्रों के लिए शिक्षा आसान बनाने हेतु तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दिया जायगा.
नाम परिवर्तन
‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय'(Ministry of Human Resources Development- MHRD) का नाम बदल कर ‘ शिक्षा मंत्रालय'(Education Ministry) रख दिया गया है.
प्रारंभिक शिक्षा में बदलाव
3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी/बलवाटिका/प्री-स्कूल (Pre-School) माध्यम से सुरक्षित और अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराई जायगी.
6 से 8 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक स्कूलों में कक्षा-1 और 2 में शिक्षा दी जायगी.
बुनियादी साक्षरता पर एक राष्ट्रीय मिशन
वर्ष 2025 तक स्कूलों में कक्षा-3 तक के सभी विद्यार्थियों में संख्यात्मक ज्ञान और बुनियादी साक्षरता प्रदान किया जाएगा.
भाषा का संरक्षण और विविधता
नई शिक्षा नीति में कक्षा-5 तक में मातृभाषा/क्षेत्रीय या स्थानीय भाषा को पढ़ाने के रूप में अपनाने पर बल दिया गया है, और मातृभाषा को कक्षा-8 और आगे की पढ़ाई के लिए प्राथमिकता देने का सुझाव है.
बधिर छात्रों के लिए भारतीय संकेत भाषा (Indian Sign Language-ISL) देश में मान्य होगा. राज्य स्तर पर पढ़ाई हेतु सामग्री भी विकसित की जायगी.
‘भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान’ (Indian Institue of Translation and Interpretation- IITI), भारतीय भाषाओं और विकास के लिए, ‘फारसी, पाली और प्राकृत के लिए राष्ट्रीय संस्थान स्थापित करने के साथ मातृभाषा/स्थानीय भाषा के महत्व को बढ़ावा देने का सुझाव है.
पाठ्यक्रम और मूल्यांकन
नई शिक्षा नीति में इस तरह से पढ़ाई की जा सकेगी जिसमे पाठ्यक्रम का बोझ न हो. और साथ ही Logical Concern को प्रोत्साहित किया जा सके.
इस नीति में कला और विज्ञान, व्यवसायिक तथा शैक्षणिक विषयों में बहुत अंतर नही होगा.
कक्षा-6 से ही पाठ्यक्रम में Professional Education को शामिल कर दिया जायगा और इसमे Internship की सुविधा भी दी जायगी.
National Council of Educational Research and Training- NCERT द्वारा स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किया जायगा.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (National Education Policy) में छात्र कक्षा-3, 5 और 8 के स्कूली परीक्षाओं में जिन्हें प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जायगा.
छात्रों के विकास को देखते हुए कक्षा-10 और 12वी की परीक्षाओं में बदलाव किए जायंगे.
भविष्य में सेमेस्टर जैसे प्रारूप को शामिल किया जा सकता है.
National Assesment Centre जिसका नाम ‘परख’ होगा, छात्रों के मूल्यांकन के लिए स्थापित किया जायगा.
छात्रों के भविष्य से जुड़े निर्णय लेने में मदद करने के लिए Artificial Intelligence-AI आधारित सॉफ्टवेयर का डेवलपमेंट किया जायगा.
शिक्षा प्रणाली
शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता तथा समय-समय पर कार्य-प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति होगी.
National Professional Standards for Teachers- NPST का विकास किया जायगा.
वर्ष 2030 तक अध्यापन के लिए न्यूनतम डिग्री 4-वर्षीय बी.एड. का होना अनिवार्य किया जायगा.
शिक्षा नीति में बदलाव क्यों?

1986 में जो शिक्षा नीति आयी उसे ही थोड़ा बदल कर 1992 से वही नीति 2020 तक चलती आयी थी.
बदलाव के पीछे दलील है की शिक्षा की क्वालिटी बढ़ाने के लिए नई नीति की ज़रूरत है. यह भी बताया है की इससे भारत ज्ञान का सुपर पावर बन सकता है.
मल्टी डिसीप्लेनेरी एजुकेशन
मतलब कोई स्ट्रीम नही होगी, कोई भी स्टूडेंट मनचाहे सब्जेक्ट चुन सकता है. जैसे अगर कोई केमिस्ट्री ग्रेजुएशन कर रहा है. उसे म्यूजिक भी पसंद है तो साथ में वह भी पढ़ सकता है.
आर्ट्स और साइन्स अलग-अलग नहीं होंगे, सिर्फ मेजर और माइनर रखा जायगा.
अभी जैसे एक यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड कई कॉलेजेस होते हैं,
पर अब कॉलेजेस को भी ऑटोनोमी दी जायगी.
हायर एजुकेशन के लिए काफी रेगुलेटर हैं भारत में, लेकिन अब सबको मिलाकर एक ही बना दिया जायगा. मेडिकल और लॉ के अलावा सभी उच्च शिक्षा के लिए सिंगल बॉडी होगी भारतीय, उच्च शिक्षा आयोग(HECI) को बनाया जायगा.
देश की हर यूनिवर्सिटी के लिए शिक्षा एक समान होगी. मतलब चाहे कोई भी यूनिवर्सिटी हो सबका स्टैण्डर्ड एक जैसा रहेगा. ऐसा नही होगा की किसी यूनिवर्सिटी में कुछ पढ़ाया जा रहा है तो किसी में कुछ. मतलब की समान शिक्षा मिलेगी हर किसी को.
और तो और कोई भी प्राइवेट कॉलेज मनमानी फीस नही ले पायंगे. कोई प्राइवेट कॉलेज कितनी फीस छात्रों से ले सकता है, इसकी कैपिंग होगी.
शिक्षा में टेक्नोलॉजी को और भी एफ्फिशिएंट तरीके से इस्तेमाल करने की भी बात हो रही है, जैसे स्मार्ट क्लास और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस.
शिखर की यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने कैंपस खोलने की इजाज़त दी जायगी.
स्कूलों में होने वाले बदलाव

उच्च शिक्षा की बातें तो हमने बता दी, अब आते हैं स्कूली बदलाव की तरफ. मतलब नर्सरी से 12वी तक.
अभी तक हमारा स्कूली सिस्टम 10+2 पाठ्यक्रम पर चलता आ रहा था. मतलब 10 तक सारे सब्जेक्ट्स और 11 में छात्रों को स्ट्रीम चुननी होती थी. अब ये बदल गया है. नए सिस्टम के मुताबिक पाठ्यक्रम 5+3+3+4 के अनुसार पढ़ाया जायगा. इसमें आखरी के 4 साल 9 से लेकर 12वी तक के हैं जिन्हें एक समान माना जायगा. इन आखरी सालों में विषय गहराई से पढ़ाए जायंगे पर स्ट्रीम चुनना नही पड़ेगा. मतलब साइंस वाला अगर कला की पढ़ाई भी करना चाहता है तो कर सकता है. ऐसे विषयों को एक्स्ट्रा कैटेगरी में नही रखा जायगा .
क्लास 6 से ही बच्चों को वोकेशनल कोर्सेज पढ़ाये जाने की बात कही जा रही है. जिससे छात्र कोई स्किल सिख पायंगे. और इंटर्नशिप भी कराई जायगी जिससे उनका स्किल निखर सके. छठी क्लास से बच्चों को प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग दी जायगी और कोडिंग भी सिखाई जायगी.
तो ये रही हमारी शिक्षा नीति के बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान. कहने को तो काफी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था के बारे में तो हम सब जानते ही हैं.
ड्राफ्ट को मंज़ूरी मिली है, लागू होना बाकी है. अभी और भी मिल के पत्थर तोड़ने हैं.
भारत को विश्व गुरु बनना है. देखते हैं क्या ये सपना वर्तमान सरकार पूरा कर पायगी. आपको क्या लगता है ? हमें ज़रूर बताएं.
धन्यवाद।
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New education policy ek achha step hai government ka
Bilkul. Yah Niti zaroor badalni chahie thi.
glad to see all the information related to NEP here, it’s surely going to change the way students study.
Thank you for your kind words. And yes, we do need the change. 🙂